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Er. Atul Katiyar

Asst. Professor

Department of Electrical Engineering

 

पुजारी

कौन देवता कौन पुजारी

मन मैं सकुचा रहा पुजारी

भेंट उन्ही के घर से लाया

गीत उन्ही के स्वर से गाया

सुमन उन्ही के वन से ले ले

कर रहा उन्ही का पूजन पुजारी

मन में सोचता रहा पुजारी

ध्यान मगन हो स्वयं खो गया

भक्त अरे भगवान हो गया

बिंदु लीं हो सिंधु बना है

फिर कौन देवता कौन पुजारी ?

मन मैं सकुचा रहा पुजारी !

 
 
 
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